सरपंची एक खौफ़- Hindi Crime Stories | Crime Story in Hindi | Hindi Kahaniyan

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“अरे भैयाजी! आज से चुनाव प्रचार शुरू हो रहा हैं तो नेताओं की भीड़ लोगों को रिझाने की कोई कसर नहीं छोडने वाली। कोई दारू की बोतलें लुटाएगा तो कोई पैसों की गड्डियां। इन सबके सामने गौरी बिटिया क्या टिक पावेगी।”

यह बात सुनकर हरिराम बोल पडे़- “अरे रामू! क्या बोल रहा हैं तू? जानता हैं ना पिछली बार वो लड़का सरपंची के चुनाव में खडा़ हुआ था तो उन दरिंदों ने क्या हाल किया था उसका। भूल गया क्या?”

अरे भाई, धीरे बोल वरना किसी ने सुन लिया तो आफ़त आ पडेगी। उनके सामने खडा़ होना मतलब शेर की गुफ़ा में हाथ डालने जैसा हैं।

यह बाते चाय की दुकान पर बैठे दो लोग कर रहे थे लेकिन सोचने की बात यह थी कि आखिर ये बात किसके बारे में हो रही थी? और क्या कारण था इस खौफ़ का? 

इसके लिए हमें उन सभी कडियों को खोलना होगा जो कहानी में कौनसे भयानक मोड़ लाएंगी, इसका अंदाज़ा लगा पाना भी नामुमकिन हैं।

कालनपुर, एक छोटा-सा गाँव जहाँ कि आबादी लगभग पाँच हजार के आसपास होगी, राजस्थान के बीकानेर में बसा हुआ था। 

इस गाँव के सरपंच कालुराम ऊर्फ कुल्लू का दबदबा इस तरह था कि उसके खिलाफ़ आवाज उठाने वाले की आवाज़ कुछ इस तरह दबा दी जाती थी कि फिर कभी वो आवाज़ उठा नहीं पाता था। वैसे कुल्लू सरपंच कोई चुनाव जीतकर नहीं बना बल्कि यह तो उनकी पुरखों की ताजपोशी का नतीजा था कि आज भी यह लोगों पर अपना ही दबदबा कायम रखना चाहता था।

कुल्लू सरपंच, नाम भले ही एक छोटा-सा था लेकिन उसका खौफ़, खौफ़ से भी खौफ़नाक था। अपना रौब कायम रखने की उसकी बेइंतहा ख्वाहिश कुछ इस कदर परवान चढी़ हुई थी कि जब कोई उसके खिलाफ़ जाकर कुछ करने की कोशिश करता था तो कुल्लू सरपंच का कहर उस पर ऐसा मंडराता था कि रातोंरात उसका नामोनिशान मिट जाता था।

लेकिन कहते हैं ना, किस्मत हमेशा एक जैसी नहीं रहती। यहीं अब कालनपुर में भी होने जा रहा था क्योंकि उसी गाँव के एक लड़के ने कुल्लू सरपंच के खिलाफ़ खडे होने की हिम्मत दिखाई थी और वो गाँव के लोगों को एक हद तक समझाने में कामयाब भी होने लगा था।

उस जाँबाज लड़के का नाम था कृष्णा। कृष्णा ने यह विरोध बेवज़ह नहीं किया था क्योंकि कुल्लू सरपंच ने उसके बाबा उदयसिंह को सिर्फ अपनी बेटी को बाहर पढ़ने के लिए भेजने पर जान से मार दिया था।

कृष्णा ने जो मुहीम अपराध के खिलाफ़ शुरू की थी वो धीरे-धीरे रंग लाने लगी थी लेकिन कुल्लू सरपंच को जब अपना दबदबा फीका पड़ता दिखा तो उसने रातों-रात कृष्णा को गाँव से गायब करवा दिया और उस दिन के बाद कृष्णा का कोई पता नहीं चल पाया कि आखिर कृष्णा गया कहाँ!!

जब बहुत दिन तक कृष्णा का कोई पता नहीं चल पाया तो गाँव वालों की हिम्मत फिर से टूटने लगी थी और एक बार फिर कालनपुर कुल्लू सरपंच के खौफ में समा चुका था।

कुछ समय इसी तरह गुजरता रहा और एक दिन गाँव में एक लड़की गौरी का आना हुआ जो विदेश से पढ़ लिखकर आयी थी और अन्याय के विरोध में खडे़ होने की हिम्मत रखती थी।

जल्द ही गौरी गाँव वालों की लाड़ली बन गयी और उनको उनके अधिकार और कर्तव्यों के बारें में समझाने लगी।

कुछ ही दिनों में गौरी ने पूरे गाँव को एकजुट कर लिया था और गाँव वालों की विनती पर ही इस बार होने वाले सरपंच के चुनाव में खडी़ भी हो रही थी।

जल्द ही यह खबर कुल्लू सरपंच के कानों में पडी़ और यह खबर सुनते ही कुल्लू सरपंच तिलमिला उठा। उसने उसी दिन गौरी को डरा धमका कर चुप करवाने के लिए कुछ हथियारबंद लोगों को भेजा लेकिन वो सब गौरी का बाल भी बाँका नहीं कर पाये बल्कि अपनी ही हड्डियां तुडवाकर वापस आ गये क्योंकि पूरे गाँव के लोग अब गौरी के साथ खड़े थे।

लेकिन गाँव वालों की यह हिम्मत क्या रंग लेकर आएगी कालनपुर के लोगों की जिंदगी में, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

 

कुछ समय यूँ ही गुज़रता रहा और आखिरकार सरपंच के चुनाव भी आ गए। आज से ठीक 5 दिन बाद सरपंच के चुनाव होंगे और इसीलिए माहौल में गहमा-गहमी बढ़ गयी थी। गाँव में सबकी जुबान पर सिर्फ गौरी बिटिया का ही नाम था और चर्चा थी कि क्या गौरी बिटिया, कुल्लू सरपंच का सामना कर पाएगी।

इन्हीं सबके बीच अचानक गौरी भी गायब हो गयी और उसका कोई पता नहीं चल पाया। लेकिन चुनाव से ठीक 2 दिन पहले गौरी वापस लौट आयी और इस बार कुछ था जो गौरी के चेहरे पर दुगुनी उत्सुकता झलक रही थी। 

इसी के साथ अचानक पूरे गाँव में पुलिस फैल चुकी थी और कुल्लू सरपंच के साथ उसके सारे साथियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया था लेकिन यह सब कैसे हुआ?? पूरे गाँव के लिए एक पहेली सा बना हुआ था।

तो गौरी ने बताया की जब मैं अचानक गायब हो गयी थी तो सच तो यही हैं कि मुझे कुल्लू सरपंच ने ही मार देने की कोशिश की थी लेकिन मैं उनके गंदे इरादों से बच गयी और खुद ही छिपकर कुल्लू सरपंच की हरकतों पर नजर रखने लगी तो मुझे पता लगा की यह लोगों को जंगल में बने हुए एक खंडहर में बंदी बनाकर रखता था और फिर उनके अंग निकालकर बाहर बेचने के लिए भेज देता था। 

मुझे इसके काले धंधे के बारे में पहले ही पता चल चुका था जब मेरे भाई कृष्णा ने इसके बारे में बताया था लेकिन उसको भी इस वहशी ने मरवा दिया और इसीलिए मैं अपने पिता और भाई की मौत का इंसाफ दिलाने के लिए दिन रात मेहनत कर के आईपीएस बनी और आज इसकी सारी करतूत दुनियां के सामने लेकर आने में सफल हो सकी।

मैंने सिर्फ सरपंच का चुनाव लड़ने का नाटक किया था, ताकि यह तिलमिला जाए और कोई गलती कर बैठे। खैर एक सरपंच, एक गाँव को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता हैं, इसीलिए अपने वोट का इस्तेमाल कर एक योग्य व्यक्ति को विजयी बनाए ताकी वो आपका और आपके गाँव का विकास कर सके, ना की खुद का घर भरने लगे।

इन सबके बाद कालनपुर गाँव ने भी एक योग्य सरपंच का चुनाव किया और आज वो विकास के क्षेत्र में अग्रसर हैं।

 

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