और वो चले गये- Sad Love Story In Hindi | Crime Story In Hindi

0 Comments

love story, love stories in hindi,hindi love story,love story hindi, best love stories in hindi, crime story

“तीन दिन बाद ही तो उसकी शादी होने वाली थी लेकिन यह सब कैसे हो गया?” पूछते हुए अनन्या रो पडी़।

रोहन और अनन्या दोनों कॉलेज के पहले साल से ही एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते थे लेकिन धीरे-धीरे यह दोस्ती कब दोस्ती से आगे बढ़ गयी पता ही नहीं चला।

रोहन एक मध्यम वर्गीय परिवार से नाता रखता था और अनन्या एक संपन्न धनाढ्य परिवार से लेकिन दोनों के बीच इस बात का फर्क कभी नहीं पडा़ कि दोनों बहुत अलग-अलग परिवारों से संबंध रखते हैं।

इस बार कॉलेज का आखिरी साल था और दोनों बिछड़ना नहीं चाहते थे तो रोहन और अनन्या ने अपने-अपने परिवार वालों को उनके रिश्ते के बारे में बताने की ठान ली।

रोहन के घरवाले तो इस रिश्ते के लिए मान गए लेकिन जब अनन्या ने अपने घरवालों से बात की तो उसके पिता विजेन्द्र सिंह ने रोहन के बारे में पूछकर उसे अगले दिन घर पर बुलाने के लिए बोल दिया।

अनन्या ने जब यह बात रोहन को फोन कर के बताई तो रोहन ने घर पर आने से इंकार कर दिया और अनन्या से उसे भूल जाने के लिए भी बोल दिया।

यह सब सुनकर अनन्या अंदर से टूट चुकी थी, वो यह सब समझ नहीं पा रही थी कि अचानक से रोहन इतना कैसे बदल सकता हैं। उसे अपने कानों से सुनी हुई बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था।

अनन्या ने रोते हुए यह बात अपने परिवार को बताई तो उसके परिवार वालों ने कहा कि यह गरीब लोग ऐसे ही होते हैं, उनको सिर्फ दौलत से मतलब होता हैं और रोहन ने भी उसको सिर्फ उसके पैसे के लिए इस्तेमाल किया होगा वरना हमसे मिलने में उसे क्या परेशानी हो सकती थी।

अनन्या यह सब चुपचाप सुन रही थी लेकिन वो यह बात अच्छे से जानती थी कि रोहन ने आजतक उससे एक भी चीज़ नहीं ली और उसने उन दोनों के रिश्ते को भी शारीरिक संबंधों तक नहीं जाने दिया था क्योंकि वो यह सब शादी से पहले कर मुझ पर कोई सवाल उठता हुआ नहीं देख सकता था ताकी मेरी इज्जत पर कोई भी आंच ना पाए।

अनन्या के पिता ने अनन्या के भाई से कहा कि वो रोहन के बारे में पता करके बताए कि उसने ऐसा क्यों किया और जब तक उसके बारे में पता नहीं चल जाता तब तक अनन्या घर से बाहर नहीं जाएगी।

दो दिन बाद अनन्या के भाई ने घर पर बताया कि रोहन की ठीक एक हफ्ते बाद शादी होने वाली हैं और एक शादी का कार्ड भी दिखाया जिस पर रोहन का नाम लिखा हुआ था।

अनन्या शादी का कार्ड देखकर पूरी तरह टूट चुकी थी कि आखिर रोहन हमारे रिश्ते को भुलाकर किसी और से शादी कैसे कर सकता हैं। क्या रोहन के दिल में मेरे लिए इतनी सी भी भावनाएँ नहीं थी कि वो एक बार मुझसे मिल लेता और मुझे बता देता कि उसने जो वादे मुझसे किए थे वो सब झूठे थे। वो इंसान जो मेरी आँखों में एक आँसू नहीं देख सकता था वो खुद मुझे रोता हुआ छोडकर इस तरह चला जाएगा।

अनन्या लगातार रोहन को फोन लगाने की कोशिश कर रही थी लेकिन रोहन का फोन नहीं लग रहा था और इसी तरह कुछ दिन गुज़र गए।

अचानक एक दिन अनन्या को एक रोहन के नंबर से फोन आया। अनन्या ने जल्दी से कॉल रिसीव किया लेकिन वो आवाज रोहन कि नहीं थी। यह किसी और कि आवाज थी जिसे सुनकर अनन्या को बहुत बडा़ झटका लगा। उधर से कोई बोल रहा था कि- “मैडम! ये फोन मुझे पहाड़ी वाले रास्ते पर पडा़ मिला था। इस कर आपका नाम My life के नाम से सेव था तो आपको फोन करके बता दिया। आप मोबाइल को भेजे हुए पते पर से आकर ले जाइएगा।”

इसके बाद कॉल कट गया…

लेकिन यह सब अनन्या को बहुत अज़ीब लग रहा था कि आखिर रोहन का मोबाइल वहाँ कैसे गया? अनन्या बिना किसी को बताए घर से निकल गयी और उस आदमी के बताए पते पर पहुँच गई तो उस आदमी ने रोहन का मोबाइल अनन्या को दे दिया लेकिन यह लगभग टूट चुका था। रोहन के टूटे हुए मोबाइल को देखकर अनन्या को बहुत चिंता होने लगी थी और गलत गलत खयाल मन में आ रहे थे तो अनन्या रोहन के घर उसका मोबाइल लौटाने चली गई।

रोहन के घर पहुँचकर अनन्या को पता चला कि रोहन पिछले कई दिनों से लापता हैं और उसका कुछ भी पता नहीं चल पाया हैं। रोहन के घर में सिर्फ उसके माँ-बाबा और उसकी छोटी बहन रानी ही रहते थे लेकिन जब से रोहन गायब हुआ हैं तब से उनकी हालत बहुत बुरी हो चुकी थी लेकिन जैसे ही अनन्या ने रोहन का टूटा हुआ मोबाइल उनको लौटाया तो उनकी उम्मीद भी शायद टूटने लगी थी कि उनका रोहन अब लौटकर वापस आएगा भी या नहीं।

यह सब सुनकर अनन्या की आँखों से भी आँसू आने लगे थे और उसने रोहन के परिवार वालों से कहा कि- “सिर्फ तीन दिन बाद ही तो रोहन की शादी होने वाली थी फिर ऐसा कैसे हो गया?”

यह सुनकर रोहन के घरवाले चौंक गए और बोले कि- यह सब तुमसे किसने कहा? रोहन ने तुम्हारे बारे में हमें बताया था और वो तुमसे बहुत प्यार करता था। वो तो बहुत खुश था कि तुम अपने घरवालों से बात कर लोगी और तुम दोनों कि शादी हो जाएगी। लेकिन वो तुम्हारे अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता तो शादी तो बहुत दूर की बात हैं।

अनन्या को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर रोहन ने फिर घर आने से मना क्यों किया और उसके भाई ने रोहन की शादी के बारे में झूठ क्यों बोला।

यह सब सोचते हुए अनन्या ने पुलिस को सब कुछ बताने के लिए रोहन के घरवालों से कहा तो रोहन के बाबा अनन्या के साथ पुलिस कमिश्नर के पास गए और सब कुछ सच-सच बता दिया।

पुलिस को रोहन के लापता होने की रिपोर्ट तो रोहन के घरवाले पहले ही लिखवा चुके थे लेकिन उन्होंने कुछ खास पड़ताल नहीं की थी।

कमिश्नर साहब एक बार कॉलेज में मुख्य अतिथि के तौर पर आए थे और उनकी बेटी शिखा अनन्या की अच्छी दोस्त भी थी तो अनन्या उनको पहचानती थी।

जब कमिश्नर साहब ने आगे से रोहन के केस के बारे में जानकारी माँगी तो लोकल पुलिस इसकी सटीक जानकारी नहीं दे पायी। इस कारण कमिश्नर साहब ने जल्द से जल्द रोहन का पता लगाने के सख्त आदेश जारी कर दिए।

इधर अनन्या वापस घर लौट आयी तो उसका पूरा परिवार गुस्से से उसका इंतजार कर रहा था। घर में पहुँचते ही उसके पिता विजेन्द्र सिंह ने बिना कुछ पुछे अनन्या को एक थप्पड़ लगा दिया और कहा- नालायक लडकी जब तुझसे कहा गया था कि तू घर से बाहर नहीं जाएगी तो तेरी हिम्मत कैसे हुई बिना बताए घर से बाहर निकलने की?

यह सब देखकर अनन्या सहम सी गई क्योंकि आजतक उसके पिता ने उससे कभी ऊँची आवाज में बात नहीं की थी और आज उन्होंने बेवजह उसे थप्पड़ मार दिया था। आखिर क्या कारण था इस गुस्से का?

विजेन्द्र सिंह के कहने पर अनन्या चुपचाप कमरे में चली गयी और सोचने लगी कि आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया कि पापा ने मुझ पर हाथ उठा दिया।

अगली सुबह अचानक पुलिस उनके घर पर आ गयी उन्होंने बताया कि उन्हें एक पता चला हैं कि आखिरी बार रोहन को उसके भाई के साथ देखा गया था।

यह कहकर पुलिस अनन्या के भाई को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई।

अनन्या को विश्वास नहीं हो रहा था कि यह सब सच हैं या फिर एक सपना। उसे बहुत डर लग रहा था क्योंकि अब यह तो अब साफ हो चुका था कि रोहन उसे धोखा नहीं दे रहा था बल्कि अनन्या को झूठ बोला गया था कि रोहन की शादी हो रही हैं।

यह सब समझ आने पर अनन्या ने अपने पिता से रोते हुए पूछा कि- आपने ऐसा क्यों किया पापा? आपने क्यों झूठ बोला कि रोहन की शादी हो रही हैं? बोलो पापा बोलो? प्लीज बोलो… 

यह कहते हुए अनन्या जमीन पर गिर गई और पागलों की तरह रोने लगी।

इस पर विजेन्द्र सिंह ने कहा कि- हाँ! झूठ बोला था तुझसे कि रोहन कि शादी हो रही हैं क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तू एक छोटे घर में शादी करे और हमारी शान पर कलंक लगा दे।

उस लडके को भी समझाया था कि तुझसे दूर चला जाए लेकिन उस पर तो इश्क का भूत चढा़ हुआ था , नहीं माना वो। बोल रहा था कि आखिरी साँस तक तुझे नहीं भूल सकता तो बस उसकी साँसे ही बंद कर दी हमने। तेरे भाई ने उससे जबरदस्ती डरा-धमकाकर कॉल करवाया था कि वो तुझसे बात नहीं करना चाहता और उसके बाद उसको मरवाकर खाई में फिकवा दिया मैंने।

अब तू चुपचाप कमरे में पडी़ रह जब तक तेरी शादी किसी अच्छे से घर में ना हो जाए वरना तेरे लिए भी अच्छा नहीं होगा।

यह सब सुनकर अनन्या एक जिंदा लाश बन चुकी थी लेकिन अब भी दिल में रोहन के लिए प्यार का एक छोटा-सा चिराग जल रहा था जैसे कह रहा हो अनन्या मुझे इंसाफ तो दिलाओगी ना। मैंने प्यार किया था लेकिन पता नहीं था कि उसकी इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। क्या तुम मेरे लिए सच सामने लाओगी, मेरे गुनहगारों को सजा दिलवाने में मदद करोगी?

यह सब सोचकर अनन्या ने वहाँ से भागकर पुलिस को सबकुछ बता देने की सोची लेकिन उसके घरवालों ने उसे कमरे में बंद कर दिया था। इन सबके बाद अनन्या जोर जोर से चिल्लाने लगी शायद उसे बहुत गहरा सदमा लगा था।

उसकी चीखे सुनकर उसके पिता विजेन्द्र सिंह कमरे में आए और अनन्या से कहा- अगर तू अब भी चुप नहीं हुई तो तेरे जन्मदाता बाप को ही तेरा आखिरी दिन भी मनाना पड़ेगा।

लेकिन अनन्या को पता नहीं क्या हो गया था वो पागलों की तरह चिल्ला रही थी और अपने पिता को धक्का देकर बाहर भागने लगी।

यह सब देखकर विजेन्द्र सिंह का गुस्सा काबू में नहीं रहा और उसने अपनी ही बेटी पर गोली चला दी और अनन्या ने उसी समय दम तोड दिया।

उधर पुलिस की सख्त पूछताछ में अनन्या के भाई ने सारा सच उगल दिया था और पुलिस विजेन्द्र सिंह समेत उन सबको गिरफ्तार करने आ चुकी थी जो इस अपराध में शामिल थे।

पुलिस जब विजेन्द्र सिंह को गिरफ्तार करने पहुँची तो वो भी अनन्या की लाश देखकर सन्न रह गई कि एक पिता ने अपनी ही बेटी की हत्या कर दी थी।

इन सबके बाद पुलिस ने विजेन्द्र सिंह और उसके साथियों को हत्या के इल्ज़ाम में गिरफ्तार कर लिया।

रोहन की लाश ढूँढने की कोशिश की गई लेकिन जंगल का पहाड़ी ईलाका होने के कारण उसकी लाश को जंगली जानवर खा चुके थे जिनकी कुछ अंगों के आधार पर पहचान की गई।

हमारे आसपास आज भी ऐसी अनेको घटनाएँ होती हैं जो ऐसे ही दर्दनाक अंजाम पर खत्म होती हैं जिनको सुनकर रूह काँप जाती हैं और इसका कारण विजेन्द्र सिंह जैसी दकियानुसी सोच ही होती हैं।

इन सबसे बचने के लिए हमें बदलना होगा और झुठी शान के पर्दे में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को होने से रोकने के लिए हम सबको मिलकर आगे बढ़ना होगा ताकी कोई और रोहन इसका शिकार ना बन पाए।

 

 

Tags: ,

Leave a Reply

Your email address will not be published.