बंदर और मगरमच्छ की कहानी- Hindi Moral Stories For Kids

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एक बार की बात हैं, एक बहुत बड़े जंगल में एक बन्दर रहा करता था और उस बन्दर का नाम था भोलू।

भोलू का स्वभाव इतना मिलनसार था की वो हर किसी से दोस्ती कर लिया करता था और बाकी के जानवर भी उससे दोस्ती करना चाहते थे।

जल्द ही भोलू का जन्मदिन आने वाला था तो उसने अपने जन्मदिन को धमाकेदार मनाने के लिए एक प्लान बनाया और निकल पडा़ जंगल में उसे पूरा करने के लिए।

एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर उछल-कूद मचाता भोलू, रास्ता भट़क गया और जंगल के बीचों-बीच स्थित एक सूनसान जगह पहुँच गया।

अब भोलू को बहुत डर लगने लगा था क्योंकि जंगल के इस इलाके को लोग बहुत ख़तरनाक बोला करते थे और भोलू को भी दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था और ना ही किसी दूसरे जानवर की आवाज आ रही थी।

भोलू, वहाँ से वापिस जाने का रास्ता ढूँढने लगा, कि तभी बरगद का एक पेड़ भोलू से बोला- “रूको भोलू! क्या तुम अपने जन्मदिन की तैयारियां करने के लिए निकले हो?”

यह सुनकर भोलू आश्चर्यचकित हो गया और बोला- “हाँ! मैं अपने जन्मदिन को बहुत ही शानदार बनाना चाहता हूँ, इसीलिए इस जंगल में कुछ ढूँढने के लिये निकला था। लेकिन आप बोलते कैसे हो, भला एक पेड़ कैसे बोल सकता हैं?”

यह सुनकर बरगद का पेड़ हँसने लगा और भोलू से बोला- “मैं एक जादुई पेड़ हूँ, और जो कोई मेरी परीक्षा में पास हो जाता है, मैं उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देता हूँ।”

यह सुनकर भोलू बहुत खुश हो गया और बरगद के पेड़ से बोला- “क्या तुम अपने हाथों से अच्छा खाना बना सकते हो? या फिर मुझे नहला कर नये नये कपड़े पहना सकते हो? या फिर मेरे लिए गुब्बारे फुला कर मेरे साथ उनमें विस्फोट कर सकते हो, जैसे मनुष्य अपने जन्मदिवस पर करते हैं? बताओ क्या कर सकते हो तुम?”

यह सुनकर बरगद का पेड़ जोर-जोर से हंसने लगा और भोलू से बोला- “बस इतनी सी बात, यह सब तो मैं चुटकियों में कर सकता हूँ लेकिन उससे पहले तुम्हें एक इम्तिहान पास करना होगा और अगर तुम उसमें पास हो जाते हो तो मैं तुम्हें तुम्हारी मनचाही चीजें दे दूँगा।”

यह सुनकर भोलू बरगद की बात मान जाता हैं तो बरगद का पेड़ भोलू से बोलता हैं- “देखो भोलू, तुम्हें एक ऐसी चीज बतानी होगी जो ताक़त से भी बड़ी होती हैं और इसके लिए तुम्हें यहाँ से पश्चिम दिशा में जाना होगा और सब अपने आप शुरु हो जाएगा।”

यह सुनकर भोलू पश्चिम दिशा में चल पडा़। जब भोलू बहुत आगे तक आ गया तो उसको एक बडा़-सा समुद्र मिला जिसके किनारे पर एक फलदार पेड़ ला हुआ था।

यह देखकर भोलू बहुत खुश हो गया और सबकुछ भूल कर फल खाने के लिए पेड़ पर चढ़ गया और मजे से फल खाने लगा। जब भोलू फल खा रहा था तो पानी में रहने वाले मगरमच्छ के मुँह में भी एक दो फल गिर गए जिसे खाकर मगरमच्छ को आनंद आ गया।

इसके बाद मगरमच्छ, भोलू से बोला- “ऐ दोस्त! यह फल तो बहुत ही स्वादिष्ट हैं, क्या तुम कुछ फल तोडकर मुझे दे दोगे?”

यह सुनकर मस्तमौला भोलू मान गया और मगरमच्छ को ढैर सारे फल तोडकर दे दिए, और इसके बदले में मगरमच्छ ने भी बंदर को पीठ पर बैठाकर पानी की सैर करवायी।

इसी तरह कुछ दिन बीत गए और भोलू तथा मगरमच्छ की अच्छी दोस्ती हो गयी।

एक दिन मगरमच्छ ने भोलू से कहा- “भोलू भाई! तुम्हारी भाभी तुमसे मिलना चाहती हैं और इसीलिए उन्होंने आज तुम्हें खाने पर बुलवाया हैं।”

यह सुनकर भोलू मान गया और मगरमच्छ की पीठ पर बैठकर बिना कुछ सोचे-समझे चल पडा़।

जब मगरमच्छ अपने घर पहुँचा तो वहाँ मगरमच्छ की पत्नी बड़ी शैतानी आवाज़ में बोली- “वाह! बडा़ ही स्वस्थ और खुशबूदार खाना हैं, आज तो मैं इसी का कलेजा़ निकालकर पकाउंगी।”

यह सुनकर भोलू की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी लेकिन उसने कुछ सोचा और मगरमच्छ की पत्नी से बोला- “भाभी सा! आपने पहले बताया ही नहीं की आपको मेरा कलेजा चाहिए था, वो तो मैं पेड़ पर ही भूल आया हूँ, अगर कहकर भिजवाती तो मैं साथ लेकर आता, अगर आप कहो तो मैं पेड़ पर से अभी कलेजा लेकर आता हूँ।”

यह सुनकर मगरमच्छ की पत्नी बोली- “ठीक हैं! तुम इसके साथ जाओ और कलेजा लेकर आओ, मुझे बहुत भूख लग रही हैं।”

इसके बाद भोलू मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया और जैसे ही मगरमच्छ पेड़ तक पहुँचा, भोलू छलाँग मारकर पेड़ पर चढ़ गया और मगरमच्छ से बोला- “तुझ जैसे धोखेबाज दोस्तों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए और रही बात मेरे कलेजे की तो मुर्ख मगरमच्छ, कलेजा भी कोई निकालकर रखने की चीज़ होती हैं जो जब मन करे निकालकर रख दो। यह तो मैने तुम लोगो को पागल बनाने के लिए बोला था ताकी तुम लोग मेरी बातों में आ जाओ और मैं अपनी जान बचाकर भाग जाऊं।”

इसके बाद बंदर वहाँ से वापस चल पडा़ तो रास्ते में उसे वो बरगद का पेड़ मिला जो भोलू से बोला- “भोलू तो क्या हैं वो चीज़ जो शारीरिक ताक़त से भी बड़ी हैं?”

यह सुनकर भोलू बोला- “वक्त पर लगाया गया दिमाग और बुद्धि ही सबसे बलवान होती हैं जिसने आज मुझे बहुत बड़े खतरे से बचाया था।”

इसके बाद बरगद ने ने भोलू को शाबासी देते हुए कहा- “एकदम सही जवाब! अब तुम वापस अपने घर जा सकते हो।” और इतना बोलकर बरगद का पेड़ गायब हो गया।

इसके बाद भोलू यह सोचता हुआ घर के लिए चल पडा़ की जान दाँव पर लगा दी उस बरगद की बातें सुनकर और देकर भी कुछ नहीं गया।

लेकिन जैसे ही भोलू घर पर पहुँचा तो वहाँ उसका घर एकदम चमचमा रहा था, उसके जन्मदिन की सारी तैयारियां हो चुकी थी और एक बडा़ सारा केक और ढैरो उपहार भी भोलू के लिए रखे हुए थे जिन्हें देखकर भोलू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

इसी तरह भोलू ने बड़े धूम-धडा़के के साथ अपना जन्मदिन मनाया और जंगल का हर जानवर उसके जन्मदिन में शरीक हुआ।

शिक्षा:- इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती हैं कि हमें धोखेबाज़ दोस्तों से दूर रहना चाहिए क्योंकि उनकी प्रवृति कभी नहीं बदल सकती और साथ ही मुसीबत के समय घबराने की जगह अपनी बुद्धि और बल का उपयोग करना चाहिए।

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